सवाल नंबर 1 से 37 तक के जवाबों के साथ पूरी गाइड
महाराष्ट्र सरकार ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code यानी UCC) के संबंध में आम जनता से सुझाव और राय मांगी है। यह अपने संवैधानिक अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता और अपने पारिवारिक कानूनों की सुरक्षा के संबंध में सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का अवसर है।
इसके लिए महाराष्ट्र सरकार की समान नागरिक संहिता समिति के आधिकारिक पोर्टल पर एक ऑनलाइन फॉर्म जारी किया गया है। इस फॉर्म में व्यक्तिगत जानकारी भरने के बाद कुल 37 सवालों के जवाब देने हैं।
इस लेख में फॉर्म भरने का पूरा तरीका, प्रत्येक सवाल के सामने YES या NO चुनने के निर्देश और सवाल नंबर 32 से 37 तक के लिए अंग्रेज़ी में तैयार किए गए जवाब दिए जा रहे हैं।
महत्वपूर्ण निर्देश: फॉर्म में दिए गए जवाबों को ध्यानपूर्वक पढ़ें। सवाल नंबर 32 से 37 तक के अंग्रेज़ी जवाबों को संबंधित बॉक्स में कॉपी-पेस्ट किया जा सकता है।
चरण 1: महाराष्ट्र सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर जाएं
सबसे पहले महाराष्ट्र सरकार की समान नागरिक संहिता से संबंधित आधिकारिक वेबसाइट खोलें।
सरकारी पोर्टल: ucc.maharashtra.gov.in
पोर्टल पर आपको यह शीर्षक दिखाई देगा:
Uniform Civil Code Committee, Maharashtra, 2026
इसके बाद Individual विकल्प चुनें। यह विकल्प व्यक्तिगत रूप से अपनी राय दर्ज करने वालों के लिए है।
अब आपके सामने व्यक्तिगत जानकारी भरने का फॉर्म खुल जाएगा।
अंतिम तारीख: उपलब्ध स्क्रीनशॉट के अनुसार, सुझाव जमा करने की अंतिम तारीख 15 नवंबर 2026 दर्ज है। फॉर्म जमा करने से पहले आधिकारिक पोर्टल पर इसकी पुष्टि अवश्य कर लें।

चरण 2: व्यक्तिगत जानकारी का फॉर्म भरें
इस चरण में अपनी सभी व्यक्तिगत जानकारियां सही-सही दर्ज करें।
| क्रमांक | फॉर्म में दिया गया विकल्प | क्या भरें? |
|---|---|---|
| 1 | First Name | अपना पहला नाम |
| 2 | Father’s / Husband’s Name | पिता या पति का नाम |
| 3 | Last Name | अपना उपनाम |
| 4 | Mobile Number | अपना सक्रिय मोबाइल नंबर |
| 5 | Religion | अपना धर्म चुनें |
| 6 | Category | अपनी संबंधित श्रेणी चुनें |
| 7 | Gender | Male या Female, जो लागू हो |
| 8 | Age | अपनी उम्र चुनें |
| 9 | State | महाराष्ट्र के निवासी होने पर Maharashtra चुनें |
| 10 | District | अपना जिला चुनें |
| 11 | Taluka | अपनी तहसील चुनें |
| 12 | Address | अपना पूरा पता लिखें |

जरूरी निर्देश
- जिन विकल्पों के साथ लाल रंग का (*) निशान लगा है, उन्हें भरना अनिवार्य है।
- मोबाइल नंबर सही दर्ज करें, क्योंकि उसका सत्यापन किया जा सकता है।
- नाम, उम्र, धर्म और पते सहित सभी जानकारियां सही भरें।
- जिला और तहसील चुनते समय अपने निवास स्थान का ध्यान रखें।
सभी जरूरी जानकारियां भरने के बाद अगले चरण पर जाएं।
चरण 3: सवाल नंबर 1 से 31 तक YES या NO चुनें
इस भाग में सरकार ने समान नागरिक संहिता के विभिन्न पहलुओं से संबंधित सवाल पूछे हैं।
नीचे प्रत्येक सवाल का हिंदी अनुवाद और इस गाइड में सुझाया गया जवाब दिया गया है।
महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण: यहां दिए गए जवाब धार्मिक स्वतंत्रता, संवैधानिक अधिकारों और विभिन्न धार्मिक समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने वाले दृष्टिकोण पर आधारित हैं। ये समिति की आधिकारिक राय नहीं, बल्कि फॉर्म भरने के लिए सुझाए गए जवाब हैं। अपनी समझ और विचारों के अनुसार जवाब चुनना आपका अधिकार है।
भाग 1: सवाल और उनके सुझाए गए जवाब
सवाल नंबर 1
क्या आप वर्तमान समय में महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता लागू करने का समर्थन करते हैं?
जवाब: NO
सवाल नंबर 2
क्या आपके विचार में धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार को प्रभावित किए बिना समान नागरिक संहिता लागू की जा सकती है?
जवाब: NO
सवाल नंबर 3
क्या आप मानते हैं कि समान नागरिक संहिता लागू करने से लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय को बढ़ावा मिलेगा?
जवाब: NO
सवाल नंबर 4
क्या आपके विचार में समान नागरिक संहिता लागू होने से कानूनी विवाद कम होंगे और कानूनी प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो जाएगी?
जवाब: NO
सवाल नंबर 5
क्या विवाह, तलाक और उनसे संबंधित अन्य मामलों के पंजीकरण तथा रिकॉर्ड रखने के लिए एक समान व्यवस्था होनी चाहिए?
जवाब: NO
सवाल नंबर 6
विवाह की न्यूनतम आयु कितनी होनी चाहिए?
- पुरुषों के लिए: 18 वर्ष चुनें।
- महिलाओं के लिए: 18 वर्ष चुनें।
नोट: ये इस गाइड में सुझाए गए विकल्प हैं। यह कानूनी सलाह नहीं है। उम्र से संबंधित जवाब देते समय वर्तमान कानूनी प्रावधानों को भी ध्यान में रखें।
सवाल नंबर 7
क्या विवाह के लिए निषिद्ध रिश्तों की एक समान सूची होनी चाहिए?
जवाब: NO
सवाल नंबर 8
क्या किसी व्यक्ति को पहली शादी के कायम रहते हुए दूसरी शादी करने से रोकना चाहिए?
जवाब: NO
सवाल नंबर 9
क्या अमान्य और रद्द किए जा सकने वाले विवाहों के कारणों तथा उनके परिणामों के लिए समान प्रावधान होने चाहिए?
जवाब: NO
सवाल नंबर 10
क्या समान नागरिक संहिता में धार्मिक रीति-रिवाजों और पारंपरिक तरीकों, जैसे निकाह की धार्मिक रस्म, को बनाए रखा जाना चाहिए?
जवाब: YES
सवाल नंबर 11
क्या सभी धार्मिक समुदायों के लिए तलाक के समान आधार और एक जैसी प्रक्रिया होनी चाहिए?
जवाब: NO
सवाल नंबर 12
क्या पुरुषों और महिलाओं के लिए तलाक के आधार समान होने चाहिए?
जवाब: NO
सवाल नंबर 13
क्या समान नागरिक संहिता के तहत न्यायिक प्रक्रिया के बिना तलाक देने के तरीकों पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए?
जवाब: NO
सवाल नंबर 14
क्या तलाक और विवाह रद्द किए जाने का पंजीकरण अनिवार्य होना चाहिए?
जवाब: NO
सवाल नंबर 15
क्या तलाकशुदा जीवनसाथी से दोबारा शादी करने पर कोई शर्त लगाना, जैसे दोबारा शादी से पहले किसी तीसरे व्यक्ति से शादी करना, प्रतिबंधित होना चाहिए?
जवाब: No
सवाल नंबर 16
क्या वैवाहिक विवादों में गुजारा भत्ता संबंधी दावों के लिए समान और लैंगिक रूप से निष्पक्ष प्रावधान होने चाहिए?
जवाब: NO
सवाल नंबर 17
क्या माता-पिता के धर्म से अलग, आश्रित बच्चों के भरण-पोषण के लिए एक समान कानून होना चाहिए?
जवाब: NO
सवाल नंबर 18
क्या आर्थिक रूप से सक्षम वयस्क बच्चों के लिए अपने आश्रित माता-पिता का भरण-पोषण करना समान कानूनी दायित्व होना चाहिए?
जवाब: YES
सवाल नंबर 19
क्या बच्चों की अभिरक्षा से संबंधित मामलों में बच्चे के कल्याण और उसके सर्वोत्तम हित को सबसे अधिक महत्व दिया जाना चाहिए?
जवाब: YES
सवाल नंबर 20
क्या माता-पिता की वैवाहिक स्थिति से अलग, सभी बच्चों को विरासत में समान अधिकार मिलने चाहिए?
जवाब: NO
सवाल नंबर 21
यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु बिना वसीयत किए हो जाती है, तो क्या संबंधित पक्षों के धर्म से अलग, विरासत के लिए समान प्रावधान होने चाहिए?
जवाब: NO
सवाल नंबर 22
क्या वसीयत बनाने और वसीयत के माध्यम से विरासत हस्तांतरित करने के लिए सभी धर्मों में समान प्रावधान होने चाहिए?
जवाब: NO
सवाल नंबर 23
क्या सभी धार्मिक समुदायों में पुरुषों और महिलाओं को विरासत में समान अधिकार मिलने चाहिए?
जवाब: NO
सवाल नंबर 24
क्या किसी व्यक्ति को वसीयत के माध्यम से अपनी पूरी संपत्ति अपनी इच्छा के अनुसार हस्तांतरित करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए?
जवाब: NO
सवाल नंबर 25
क्या वर्तमान कानूनी व्यवस्था में वैवाहिक विवादों को सुलझाने से संबंधित प्रावधान इतने जटिल और समय लेने वाले हैं कि संभावित जीवनसाथी विवाह करने के बजाय लिव-इन रिलेशनशिप को प्राथमिकता देने लगते हैं?
जवाब: NO
सवाल नंबर 26
क्या समान नागरिक संहिता में लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले पुरुषों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रावधान शामिल होने चाहिए?
जवाब: NO
सवाल नंबर 27
क्या लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य होना चाहिए?
जवाब: YES
सवाल नंबर 28
क्या लिव-इन रिलेशनशिप समाप्त होने पर उसका पंजीकरण भी अनिवार्य होना चाहिए?
जवाब: YES
सवाल नंबर 29
क्या समान नागरिक संहिता में लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं के अधिकारों, जैसे विरासत और कुछ परिस्थितियों में गुजारा भत्ता, की सुरक्षा के लिए प्रावधान शामिल होने चाहिए?
जवाब: NO
सवाल नंबर 30
क्या लिव-इन रिलेशनशिप से पैदा हुए बच्चों को विरासत के अधिकार मिलने चाहिए?
जवाब: NO
सवाल नंबर 31
क्या लिव-इन रिलेशनशिप से पैदा हुए बच्चों को अपने माता-पिता से देखभाल और भरण-पोषण प्राप्त करने का अधिकार होना चाहिए?
जवाब: YES

चरण 4: सवाल नंबर 32 से 37 तक अंग्रेज़ी में दिए गए जवाब कॉपी-पेस्ट करें
यह फॉर्म का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां आपको केवल YES या NO चुनने के बजाय अपने विचार और सुझाव लिखित रूप में प्रस्तुत करने हैं।
नीचे हर सवाल का हिंदी अनुवाद और उसके लिए तैयार अंग्रेज़ी जवाब दिया गया है।
फॉर्म भरने का तरीका: संबंधित सवाल के नीचे दिए गए अंग्रेज़ी जवाब को कॉपी करें और सरकारी पोर्टल पर उसी सवाल के जवाब वाले बॉक्स में पेस्ट कर दें।
सवाल नंबर 32
सवाल: आपके विचार में समान नागरिक संहिता के अंतर्गत किन मामलों को शामिल किया जाना चाहिए?
कॉपी-पेस्ट करने के लिए अंग्रेज़ी जवाब:
The Uniform Civil Code (UCC) may cover civil and family matters where common legal principles can be established without infringing upon religious freedom or fundamental religious beliefs. Any such law must comply with Articles 14, 15, 21, and 25 of the Indian Constitution, while ensuring a fair balance between constitutional equality, religious freedom, and the legitimate rights of all religious communities, as envisaged under Article 44.
सवाल नंबर 33
सवाल: विवाह के पंजीकरण, तलाक, विरासत और अन्य पारिवारिक मामलों में लोगों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है? वर्तमान स्थिति में सुधार के लिए आप क्या सुझाव देंगे?
कॉपी-पेस्ट करने के लिए अंग्रेज़ी जवाब:
India is a pluralistic, multi-religious country. Matters such as marriage, divorce, and inheritance should respect each community’s religious beliefs and personal laws. Any reform must uphold Articles 25 and 26 of the Indian Constitution, while balancing religious freedom, constitutional equality, and the rights, dignity, and justice of all citizens.
सवाल नंबर 34
सवाल: क्या पारिवारिक कानूनों के कुछ प्रावधान महिलाओं के प्रति भेदभावपूर्ण हैं? उदाहरण दीजिए। क्या आप इन प्रावधानों का समर्थन करते हैं? यदि नहीं, तो उनमें मौजूद भेदभाव को समाप्त करने के लिए क्या सुझाव देंगे?
कॉपी-पेस्ट करने के लिए अंग्रेज़ी जवाब:
No. Every religion has its own principles and beliefs, which should be respected. Disregarding these differences may lead to unnecessary conflicts and social discord. Therefore, if any discrimination exists, awareness should be promoted to eliminate it while respecting religious freedom, equality, and the constitutional rights of all citizens.
सवाल नंबर 35
सवाल: क्या कृषि भूमि और पैतृक घर की विरासत से संबंधित कानून अन्य संपत्तियों की विरासत के कानूनों से अलग होने चाहिए? यदि हां, तो क्यों और किस प्रकार?
कॉपी-पेस्ट करने के लिए अंग्रेज़ी जवाब:
No. A uniform inheritance law is not necessary, as different religious communities in India have their own inheritance laws based on their respective religious principles and traditions. These laws should be duly recognised and implemented in accordance with the Constitution of India, while ensuring legal protection, fairness, and respect for religious freedom and the rights of all citizens.
सवाल नंबर 36
सवाल: क्या बच्चों को अपने माता-पिता से भरण-पोषण और विरासत के समान अधिकार मिलने चाहिए, चाहे उनका जन्म विवाह के भीतर हुआ हो या विवाह के बाहर?
कॉपी-पेस्ट करने के लिए अंग्रेज़ी जवाब:
Yes, certainly. However, policies should respect India’s diverse religious beliefs, cultural traditions, and social values rather than promote any particular lifestyle. As a pluralistic society, India must balance cultural sensitivities with constitutional rights. Any legal framework concerning live-in relationships should be consistent with the Constitution, applicable laws, individual liberty, and the dignity of all citizens.
सवाल नंबर 37
सवाल: मौजूदा पारिवारिक कानूनों के किन प्रावधानों को एक न्यायपूर्ण और समान व्यवस्था स्थापित करने के लिए समाप्त या संशोधित करने की आवश्यकता है? बेहतर, सामंजस्यपूर्ण और दूरदर्शी महाराष्ट्र के लिए समान नागरिक संहिता में कौन-से प्रावधान शामिल किए जाने चाहिए?
कॉपी-पेस्ट करने के लिए अंग्रेज़ी जवाब:
Articles 26 and 29 safeguard equality, non-discrimination, religious freedom and cultural rights, while Article 44 guides the State towards a UCC. Muslim marriage, divorce, inheritance and family matters should respect Quranic and Sunnah-based principles. No community should be forced to violate its fundamental religious obligations. Meaningful consultation with all communities is essential to ensure justice, equality, dignity and religious freedom.

चरण 5: फॉर्म जमा करने से पहले इन बातों का ध्यान रखें
सभी सवालों के जवाब भरने के बाद निम्नलिखित बातों की जांच जरूर कर लें।
- सवाल नंबर 1 से 31: प्रत्येक सवाल के सामने इस गाइड में दिए गए सुझाए गए जवाब के अनुसार YES या NO चुनें।
- सवाल नंबर 6: पुरुषों और महिलाओं के लिए उम्र का विकल्प सावधानी से जांचें।
- सवाल नंबर 32 से 37: हर अंग्रेज़ी जवाब को उसी क्रमांक वाले सवाल के बॉक्स में पेस्ट करें।
- अक्षरों की सीमा: प्रत्येक जवाब के नीचे अक्षरों की संख्या दिखाई देती है। ध्यान रखें कि जवाब संबंधित बॉक्स की निर्धारित सीमा, यानी 600 अक्षरों, के भीतर हो।
- व्यक्तिगत जानकारी: अपना नाम, मोबाइल नंबर, जिला और पता सही होने की पुष्टि करें।
- अतिरिक्त सुझाव: फॉर्म में अतिरिक्त दस्तावेज PDF के रूप में अपलोड करने का विकल्प भी उपलब्ध है। इसकी अधिकतम सीमा 2 MB है। यदि आपके पास कोई अतिरिक्त लिखित सुझाव या दस्तावेज है, तो उसे इस भाग में अपलोड कर सकते हैं।
- अंतिम जांच: फॉर्म जमा करने से पहले सभी जवाबों को दोबारा पढ़ें।
इसके बाद Submit Suggestion बटन पर क्लिक करें।
यदि पोर्टल मोबाइल नंबर के सत्यापन या किसी अन्य प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कहता है, तो उसके निर्देशों का पालन करें। फॉर्म जमा होने की पुष्टि को सुरक्षित रखें।
एक महत्वपूर्ण संवैधानिक पहलू: अपनी राय में किन मुद्दों पर ध्यान दें?
इस गाइड में तैयार किए गए जवाब मुख्य रूप से तीन महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित हैं।
1. धार्मिक स्वतंत्रता की सुरक्षा
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 धार्मिक स्वतंत्रता और अनुच्छेद 26 धार्मिक मामलों के प्रबंधन से संबंधित अधिकारों की सुरक्षा करता है।
किसी भी कानूनी सुधार के दौरान इन अधिकारों और संबंधित संवैधानिक सीमाओं को ध्यान में रखना आवश्यक है।
2. धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता का सम्मान
भारत विभिन्न धर्मों, परंपराओं और व्यक्तिगत कानूनों वाला देश है। पारिवारिक कानूनों में किसी भी बदलाव पर विचार करते समय विभिन्न धार्मिक समुदायों के विश्वासों और संवैधानिक अधिकारों को उचित महत्व दिया जाना चाहिए।
3. संवैधानिक समानता और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन
संविधान का अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता से संबंधित है, जबकि अनुच्छेद 44 राज्य को समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में प्रयास करने का निर्देश देता है।
इन दोनों प्रावधानों को उनके संवैधानिक संदर्भ में समझना जरूरी है।
अनुच्छेद 44, अनुच्छेद 25 और अन्य मौलिक अधिकारों की तरह मौलिक अधिकारों वाले भाग में शामिल नहीं है। यह राज्य के नीति-निदेशक तत्वों का हिस्सा है।
इसलिए समान नागरिक संहिता से संबंधित किसी भी प्रस्ताव पर विचार करते समय संवैधानिक समानता, धार्मिक स्वतंत्रता और देश की विविध धार्मिक परंपराओं के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
अंतिम अपील
समान नागरिक संहिता जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी राय दर्ज करना प्रत्येक संबंधित नागरिक के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है।
इसलिए जरूरी है कि हम केवल भावनाओं के आधार पर नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता, कानूनी सिद्धांतों और अपने दृष्टिकोण की स्पष्ट समझ के साथ सरकार तक अपनी बात पहुंचाएं।
इस लेख को उन लोगों तक भी पहुंचाएं, जो महाराष्ट्र सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर अपनी राय दर्ज करना चाहते हैं। इससे उन्हें फॉर्म भरने की प्रक्रिया समझने और निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने सुझाव प्रस्तुत करने में मदद मिलेगी।
आधिकारिक पोर्टल: ucc.maharashtra.gov.in
महत्वपूर्ण नोट: इस लेख में दिए गए YES/NO विकल्प और लिखित जवाब एक सुझाया गया जवाब-पत्र हैं, सरकार या समिति के आधिकारिक निष्कर्ष नहीं। फॉर्म जमा करने से पहले प्रत्येक सवाल को स्वयं पढ़ें और सुनिश्चित करें कि आपका जवाब आपके विचारों और समझ को सही ढंग से व्यक्त करता है।
संपादकीय सुझाव: वेबसाइट पर प्रकाशित करने से पहले सवाल नंबर 15 और 36 के जवाबों की विशेष रूप से जांच कर लें। मूल लेख में सवाल नंबर 15 के लिए एक जगह YES और दूसरी जगह NO दिया गया है। सवाल नंबर 36 का अंग्रेज़ी जवाब भी बच्चों के भरण-पोषण और विरासत के अधिकारों के बजाय मुख्य रूप से लिव-इन रिलेशनशिप पर केंद्रित है। ऐसे विरोधाभासों को दूर करना जरूरी है, ताकि पाठकों को गलत निर्देश न मिलें।



