कुलपति प्रो. मज़हर आसिफ और कुलसचिव प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिज़वी के नेतृत्व में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के बदलते स्वरूप पर एक दृष्टि
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!डॉ. आसिफ उमर
एसोसिएट प्रोफेसर
हिन्दी विभाग
जामिया मिल्लिया इस्लामिया
नई दिल्ली-110025
जामिया मिल्लिया इस्लामिया केवल एक विश्वविद्यालय का नाम नहीं है। यह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन, राष्ट्रीय चेतना, शिक्षा, सामाजिक सरोकार, सांस्कृतिक विविधता और लोकतांत्रिक मूल्यों की एक ऐसी जीवंत परंपरा है, जिसने अपने सौ से अधिक वर्षों के सफर में देश की कई पीढ़ियों को दिशा दी है। 1920 में स्थापित यह केंद्रीय विश्वविद्यालय आज भी शिक्षा और शोध के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है। जामिया की उपलब्धियों को केवल आंकड़ों और रैंकिंग में नहीं मापा जा सकता, क्योंकि इसकी असली शक्ति उसके विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधार्थियों, कर्मचारियों और उस व्यापक सामाजिक चेतना में निहित है, जिसे यह संस्था लगातार मजबूत करती रही है।
लेकिन किसी भी महान संस्था की विकास-यात्रा में नेतृत्व की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। नेतृत्व की दूरदृष्टि, निर्णय लेने की क्षमता, प्रशासनिक दक्षता और सामूहिक टीम को साथ लेकर चलने की क्षमता संस्था की गति और दिशा दोनों निर्धारित करती है। पिछले कुछ समय में जामिया मिल्लिया इस्लामिया में दिखाई देने वाली अकादमिक सक्रियता, प्रशासनिक सुधार, परीक्षा व्यवस्था में तेजी, अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में उल्लेखनीय प्रगति, नए पाठ्यक्रमों का विस्तार, वैश्विक संपर्क, कर्मचारी हितों के प्रति संवेदनशीलता तथा विद्यार्थियों के लिए सुविधाओं के विस्तार को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
जामिया के वर्तमान कुलपति प्रोफेसर मज़हर आसिफ और कुलसचिव प्रोफेसर मोहम्मद महताब आलम रिज़वी के नेतृत्व में विश्वविद्यालय ने अकादमिक उत्कृष्टता और प्रशासनिक दक्षता को एक-दूसरे का पूरक बनाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रयास किए हैं। जामिया के आधिकारिक अभिलेखों के अनुसार, इस नेतृत्वकाल में अकादमिक विस्तार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन, प्रशासनिक दक्षता और अंतरराष्ट्रीयकरण पर विशेष बल दिया गया है।
रैंकिंग में छलांग : उपलब्धियों का वैश्विक प्रमाण
किसी विश्वविद्यालय की गुणवत्ता का अंतिम पैमाना केवल रैंकिंग नहीं होती, लेकिन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग किसी संस्था के अकादमिक प्रदर्शन, शोध, शिक्षण, अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण और संस्थागत प्रभाव का एक महत्वपूर्ण संकेतक अवश्य होती हैं।
जामिया ने हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। Times Higher Education World University Rankings 2026 में जामिया 401–500 के बैंड में पहुंचा और भारत के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। इसके साथ ही NIRF 2025 की विश्वविद्यालय श्रेणी में जामिया ने चौथा स्थान हासिल किया और समग्र श्रेणी में 13वां स्थान बरकरार रखा। NIRF की SDG श्रेणी में विश्वविद्यालय को तीसरा स्थान मिला।
यह उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण है कि यह केवल एक वर्ष के प्रदर्शन का परिणाम नहीं मानी जा सकती। इसके पीछे विश्वविद्यालय के शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और प्रशासनिक तंत्र की सामूहिक मेहनत है। नेतृत्व की भूमिका इस सामूहिक ऊर्जा को एक दिशा देने में दिखाई देती है।
वर्ष 2026 में जामिया ने वैश्विक रैंकिंग के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज की। QS World University Rankings 2027 में विश्वविद्यालय 75 स्थान ऊपर उठकर 686वें वैश्विक स्थान पर पहुंचा, जिसे जामिया ने अपनी अब तक की सर्वोच्च QS रैंकिंग के रूप में दर्ज किया है।
इसी तरह Times Higher Education Asia University Rankings 2026 में जामिया को 160वां स्थान मिला।
इन उपलब्धियों से यह संकेत मिलता है कि जामिया का अकादमिक प्रभाव राष्ट्रीय सीमाओं से आगे बढ़ रहा है। यह उस सोच का परिणाम है जिसमें स्थानीय जड़ों से जुड़े रहते हुए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की आकांक्षा दिखाई देती है।
प्रो. मज़हर आसिफ : अकादमिक दृष्टि और नई शिक्षा व्यवस्था
कुलपति प्रो. मज़हर आसिफ की नेतृत्व शैली की एक महत्वपूर्ण विशेषता अकादमिक विस्तार को प्रशासनिक सुधार के साथ जोड़ना दिखाई देती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन की दिशा में विश्वविद्यालय ने कई कदम उठाए हैं। नए पाठ्यक्रमों, कौशल आधारित शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा और बहुविषयक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने की दिशा में पहल हुई है।
जामिया ने 2025–26 के दौरान जर्मन स्टडीज और जापानी स्टडीज में बीए ऑनर्स जैसे नए कार्यक्रम तथा चाइल्ड गाइडेंस एंड काउंसलिंग में एडवांस्ड डिप्लोमा जैसे कार्यक्रम शुरू किए। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों में भाषायी दक्षता, अंतर-सांस्कृतिक समझ और रोजगारोन्मुख कौशल विकसित करना है।
भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने के लिए Indian Knowledge Systems यानी भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देना भी इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ भारतीय बौद्धिक परंपरा का संवाद स्थापित करना आज की उच्च शिक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
प्रो. आसिफ स्वयं राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 से जुड़े कार्यों में भूमिका निभा चुके हैं। जामिया के आधिकारिक विवरण के अनुसार, विश्वविद्यालय ने अपने पाठ्यक्रमों और कार्यक्रमों में NEP 2020 के प्रावधानों को लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है।
यह दृष्टिकोण केवल पाठ्यक्रम परिवर्तन तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करना है जिसमें विद्यार्थी ज्ञान के साथ कौशल, मूल्य, संवेदनशीलता और रोजगार की बदलती आवश्यकताओं को भी समझ सकें।
प्रशासनिक दक्षता : नेतृत्व की सबसे बड़ी कसौटी
किसी विश्वविद्यालय का कुलपति अकादमिक दिशा निर्धारित करता है, लेकिन उस दिशा को जमीन पर उतारने के लिए प्रभावी प्रशासनिक तंत्र आवश्यक होता है। इस दृष्टि से कुलसचिव प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिज़वी की भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
कुलसचिव विश्वविद्यालय के प्रशासनिक ढांचे की महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। वित्त, नियुक्ति, पदोन्नति, कार्यालयी कार्य, कर्मचारियों से संबंधित मामले, विभिन्न समितियों का समन्वय और विश्वविद्यालय के दैनिक प्रशासन से जुड़े अनेक कार्यों में कुलसचिव की भूमिका होती है। ऐसे में प्रशासनिक संवेदनशीलता और निर्णयों में समयबद्धता किसी भी बड़े विश्वविद्यालय की कार्यक्षमता को प्रभावित करती है।
जामिया के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, वर्तमान नेतृत्व में बहुत से शिक्षकों तथा अधिकांश गैर-शिक्षण कर्मचारियों की लंबित पदोन्नतियों को लागू किया गया। कई वर्षों से रिक्त पदों पर नई नियुक्तियों की प्रक्रिया भी आगे बढ़ी।
यह उपलब्धि केवल प्रशासनिक आंकड़ा नहीं है। किसी कर्मचारी के लिए पदोन्नति उसके वर्षों के परिश्रम की संस्थागत मान्यता होती है। इसी प्रकार समय पर वेतन मिलना किसी भी कर्मचारी के सम्मान और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा विषय है। विश्वविद्यालय के आधिकारिक विवरण में कहा गया है कि अनुबंधित तथा ग्रेड-3 और ग्रेड-4 कर्मचारियों के वेतन भुगतान को नियमित किया गया और भुगतान माह के पहले सप्ताह में सुनिश्चित करने पर बल दिया गया।
एक संवेदनशील प्रशासन वही है जो संस्था को केवल फाइलों और नियमों से नहीं, बल्कि उसमें काम करने वाले मनुष्यों की आकांक्षाओं और कठिनाइयों से भी देखता है। इस दृष्टि से कर्मचारी कल्याण की दिशा में उठाए गए कदम प्रशासन की मानवीय संवेदना को रेखांकित करते हैं।
सेवानिवृत्त कर्मचारियों का सम्मान : प्रशासन में संवेदना का समावेश
किसी संस्था की संस्कृति का पता इस बात से चलता है कि वह अपने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के साथ कैसा व्यवहार करती है। जामिया प्रशासन ने सेवानिवृत्त शिक्षकों और कर्मचारियों के सम्मान में मासिक विदाई-सह-सम्मान कार्यक्रमों की परंपरा शुरू की। इन कार्यक्रमों में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सम्मानित करने के साथ उसी अवसर पर सेवानिवृत्ति लाभों से संबंधित चेक उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई।
यह पहल प्रशासन को मानवीय चेहरा देती है। विश्वविद्यालय के विकास में दशकों तक योगदान देने वाले कर्मचारियों को सम्मान देना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि संस्थागत स्मृति और कृतज्ञता को जीवित रखने का माध्यम है।
जामिया जैसे ऐतिहासिक संस्थान में यह भावना विशेष महत्व रखती है। विश्वविद्यालय केवल वर्तमान कर्मचारियों और विद्यार्थियों से नहीं बनता; इसके पीछे कई पीढ़ियों का श्रम और समर्पण होता है।
परीक्षा और प्रवेश व्यवस्था में समयबद्धता
उच्च शिक्षा में परीक्षा परिणाम में देरी विद्यार्थी के भविष्य को सीधे प्रभावित करती है। उच्च शिक्षा में प्रवेश, छात्रवृत्ति, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाएं और आगे की पढ़ाई—इन सभी के लिए समय पर परिणाम आवश्यक है।
जून 2026 में जामिया ने 280 से अधिक अकादमिक कार्यक्रमों की सेमेस्टर परीक्षाएं निर्धारित समय में आयोजित कीं। लगभग 20,000 विद्यार्थियों ने परीक्षाओं में भाग लिया और लगभग 800 परीक्षा परिणाम निर्धारित समय-सीमा में घोषित किए गए। विश्वविद्यालय ने 2026–27 के प्रवेश के लिए भी 280 से अधिक कार्यक्रमों की प्रवेश परीक्षाएं आयोजित कीं।
यह काम इसलिए भी चुनौतीपूर्ण था क्योंकि प्रवेश परीक्षाओं के लिए एक लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए और परीक्षाएं देश के 16 शहरों में आयोजित की गईं।
इस व्यापक प्रक्रिया में कुलपति और कुलसचिव की ओर से समयबद्धता, पारदर्शिता और समन्वय पर जोर दिया जाना प्रशासनिक कार्य संस्कृति में बदलाव का संकेत देता है। स्वयं परीक्षा नियंत्रक ने कुलपति और कुलसचिव के मार्गदर्शन और सहयोग को इस प्रक्रिया की सफलता में महत्वपूर्ण बताया।
परीक्षा व्यवस्था में SWAYAM पाठ्यक्रमों को अकादमिक एवं परीक्षा प्रणाली में शामिल करना भी डिजिटल और नई शिक्षा व्यवस्था की ओर बढ़ता कदम है।
डिजिटल प्रशासन की ओर बढ़ता जामिया
आज का विश्वविद्यालय केवल ईंट-पत्थर की इमारतों से नहीं चलता। डिजिटल प्रशासन, ऑनलाइन सेवाएं, पारदर्शी प्रक्रिया और सूचना तक आसान पहुंच आधुनिक विश्वविद्यालय की अनिवार्य जरूरतें बन चुकी हैं।
जामिया में ऑनलाइन प्रोविजनल मार्कशीट जारी करने की दिशा में कदम, परीक्षा एवं मूल्यांकन प्रक्रिया में सुधार तथा ऑटोमेशन की पहल विद्यार्थियों के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास हैं।
इन सुधारों का महत्व उस विद्यार्थी के लिए समझा जा सकता है जिसे उच्च शिक्षा के लिए दूसरे विश्वविद्यालय में आवेदन करना हो या किसी नौकरी के लिए समय पर दस्तावेज जमा करने हों। एक डिजिटल और समयबद्ध विश्वविद्यालय विद्यार्थी की ऊर्जा को अनावश्यक कार्यालयी प्रक्रियाओं में खर्च होने से बचाता है।
अंतरराष्ट्रीयकरण : जामिया की सीमाओं का विस्तार
जामिया की पहचान हमेशा से बहुलतावादी और अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण वाली रही है। वर्तमान नेतृत्व में इस वैश्विक दृष्टि को संस्थागत रूप देने की दिशा में नए कार्यालयों और व्यवस्थाओं पर जोर दिया गया है।
विश्वविद्यालय में Dean International Relations, Dean Academic Affairs और Dean Alumni Affairs जैसे संस्थागत पदों की स्थापना की गई। विदेशी विद्यार्थियों के कार्यक्रमों में विभिन्न देशों के राजनयिकों और सांस्कृतिक प्रतिनिधियों की भागीदारी हुई तथा ईरानोलॉजी हॉल जैसी पहल के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक और अकादमिक संवाद को बढ़ावा दिया गया।
यह पहल केवल विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ समझौते करने तक सीमित नहीं है। वास्तविक अंतरराष्ट्रीयकरण का अर्थ है विद्यार्थियों और शिक्षकों को वैश्विक बौद्धिक विमर्श से जोड़ना, विभिन्न संस्कृतियों को समझना और ज्ञान की सीमाओं को विस्तृत करना।
‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भारतीय अवधारणा को आधुनिक उच्च शिक्षा से जोड़ने की दृष्टि से यह दिशा विशेष महत्व रखती है।
शिक्षा से रोजगार तक : विद्यार्थियों के भविष्य पर जोर
विश्वविद्यालय की सफलता का सबसे बड़ा पैमाना उसके विद्यार्थियों का भविष्य है। उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर, सक्षम और जिम्मेदार नागरिक बनाना है।
जामिया के विद्यार्थियों को देश-विदेश की प्रतिष्ठित संस्थाओं और कंपनियों में अवसर मिल रहे हैं। विश्वविद्यालय के 2025 बैच के प्लेसमेंट संबंधी आधिकारिक विवरण में विभिन्न तकनीकी कार्यक्रमों के विद्यार्थियों को प्रतिष्ठित कंपनियों में आकर्षक पैकेज और प्री-प्लेसमेंट ऑफर मिलने का उल्लेख किया गया है। विश्वविद्यालय ने इन उपलब्धियों को कुलपति प्रो. मज़हर आसिफ और कुलसचिव प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिज़वी के नेतृत्व से भी जोड़ा है।
इसी प्रकार 2026 में जामिया के Residential Coaching Academy–Civil Services Coaching Programme से जुड़े विद्यार्थियों की उपलब्धियां भी चर्चा में रहीं। जुलाई 2026 में RCA-CCCP के पहले Alumni Meet के अवसर पर केंद्रीय और राज्य सेवाओं में 120 चयन का उल्लेख किया गया।
ये उपलब्धियां बताती हैं कि जामिया की शिक्षा का प्रभाव कक्षा और पुस्तकालय से आगे जाकर विद्यार्थियों के करियर तक पहुंच रहा है।
पुस्तकालय और अध्ययन संस्कृति
विश्वविद्यालय में पुस्तकालय केवल किताबों का संग्रह नहीं होता, बल्कि वह ज्ञान का लोकतांत्रिक केंद्र होता है। इसलिए विद्यार्थियों के लिए अध्ययन स्थलों का विस्तार महत्वपूर्ण है।
जुलाई 2026 में जामिया ने पुस्तकालय के रीडिंग हॉल की क्षमता बढ़ाने और उन्हें सप्ताह के सातों दिन, सप्ताहांत सहित, खुले रखने की पहल की।
यह निर्णय विद्यार्थी-केंद्रित प्रशासन की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है। विशेष रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं, शोध और उच्च अध्ययन की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए लंबे समय तक उपलब्ध अध्ययन सुविधाएं अत्यंत उपयोगी होती हैं।
पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता
आज विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी केवल शिक्षा और शोध तक सीमित नहीं है। जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय संकट के दौर में हर शिक्षण संस्थान को पर्यावरण संरक्षण में अपनी भूमिका निभानी होगी।
जामिया में ‘मां वाटिका’ की स्थापना और 101 आम के पौधों का रोपण तथा वर्षाजल संचयन के लिए तालाब विकसित करने की योजना इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इस कार्यक्रम में कुलपति और कुलसचिव दोनों की भागीदारी रही।
NIRF 2025 की SDG श्रेणी में जामिया का तीसरा स्थान प्राप्त करना भी इस व्यापक पर्यावरणीय और सामाजिक प्रतिबद्धता के संदर्भ में उल्लेखनीय है।
किसी विश्वविद्यालय के परिसर में लगाए गए पेड़ आने वाली पीढ़ियों के लिए संदेश होते हैं। वे बताते हैं कि शिक्षा केवल पुस्तकों में नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ हमारे संबंध में भी निहित है।
अकादमिक विस्तार और नई संस्थागत संभावनाएं
जामिया के विकास में नए विभागों और शैक्षणिक कार्यक्रमों की स्थापना का भी विशेष महत्व है। शिक्षा मंत्रालय की स्वीकृति से Department of Library and Information Science की स्थापना की दिशा में छह शिक्षण पदों की स्वीकृति को जामिया के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया गया है। विश्वविद्यालय में पुस्तकालय विज्ञान का बी.लिब.आई.एससी. पाठ्यक्रम लंबे समय से संचालित हो रहा था, लेकिन स्थायी शिक्षण संकाय की कमी एक चुनौती थी।
इसी तरह Faculty of Dentistry में MDS कार्यक्रम शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त होना भी अकादमिक विस्तार की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
इन पहलों से स्पष्ट है कि नेतृत्व का ध्यान केवल मौजूदा व्यवस्थाओं को चलाने पर नहीं, बल्कि संस्थान की भविष्य की अकादमिक संरचना को मजबूत करने पर भी है।
तालिमी मेला : परंपरा और आधुनिकता का संगम
जामिया की पहचान केवल कक्षाओं और शोध प्रयोगशालाओं से नहीं, बल्कि उसके सांस्कृतिक जीवन से भी है। तालिमी मेला विश्वविद्यालय की उस परंपरा का हिस्सा है जिसमें शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक संवाद एक साथ दिखाई देते हैं।
2025 में कोविड-19 के बाद पहली बार छह दिवसीय तालिमी मेले का आयोजन किया गया। यह आयोजन विश्वविद्यालय के सांस्कृतिक जीवन को पुनः सक्रिय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम था।
ऐसे आयोजनों का महत्व इसलिए है कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने वाला संस्थान न रहकर एक जीवंत सांस्कृतिक परिसर बनता है। विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, विभिन्न संस्कृतियों को समझने और सामूहिकता की भावना विकसित करने का अवसर मिलता है।
राजभाषा हिन्दी के प्रति प्रतिबद्धता
जामिया की बहुभाषिक पहचान के बीच हिन्दी का महत्व भी लगातार बढ़ रहा है। कुलपति प्रो. मज़हर आसिफ को भारत सरकार के गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग द्वारा दिल्ली केंद्रीय-1 की नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी गई, जिसमें 191 केंद्रीय सरकारी कार्यालय शामिल हैं।
यह जिम्मेदारी न केवल व्यक्तिगत सम्मान है, बल्कि जामिया के बहुभाषिक और राष्ट्रीय चरित्र को भी रेखांकित करती है। विश्वविद्यालय में हिन्दी, उर्दू, अंग्रेजी और अन्य भारतीय एवं विदेशी भाषाओं का सहअस्तित्व भारतीय संस्कृति की बहुलतावादी परंपरा का प्रतीक है।
नेतृत्व की साझा शैली
प्रो. मज़हर आसिफ और प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिज़वी की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक यह दिखाई देती है कि दोनों ने विश्वविद्यालय के विकास को व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय संस्थागत सामूहिक प्रयास से जोड़ने पर बल दिया है।
जामिया के IQAC की संरचना में कुलपति अध्यक्ष और कुलसचिव सदस्य के रूप में शामिल हैं। यह व्यवस्था विश्वविद्यालय की गुणवत्ता-आश्वासन प्रक्रिया में दोनों के संस्थागत समन्वय को दर्शाती है।
किसी विश्वविद्यालय में कुलपति की दृष्टि और कुलसचिव की प्रशासनिक क्षमता जब एक-दूसरे के साथ तालमेल बनाती हैं, तब योजनाएं केवल कागज पर नहीं रहतीं। वे विभागों, संकायों, कार्यालयों और विद्यार्थियों तक पहुंचती हैं।
जामिया के सामने भविष्य की चुनौतियां
उपलब्धियों की चर्चा के साथ भविष्य की चुनौतियों पर विचार करना भी आवश्यक है। एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय के सामने निरंतर गुणवत्ता बनाए रखने, वैश्विक स्तर पर शोध को और मजबूत करने, उद्योग-अकादमिक संबंध बढ़ाने, रोजगारोन्मुख शिक्षा को विस्तार देने, डिजिटल प्रशासन को पूर्ण रूप से लागू करने और विद्यार्थियों की बढ़ती आकांक्षाओं को पूरा करने की चुनौतियां बनी रहती हैं।
रैंकिंग में ऊपर पहुंचना उपलब्धि है, लेकिन उस स्थान को बनाए रखना उससे बड़ी चुनौती है। अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ शोध सहयोग, विदेशी विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि, पेटेंट और नवाचार, स्टार्टअप संस्कृति, बहुविषयक शोध तथा समाजोपयोगी अनुसंधान को और मजबूत करने की आवश्यकता होगी।
इसी प्रकार जामिया की ऐतिहासिक और वैचारिक विरासत को आधुनिक तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल शिक्षा और वैश्विक ज्ञान अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ना आने वाले वर्षों की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
इन चुनौतियों के बीच कुलपति और कुलसचिव की वर्तमान नेतृत्व शैली की असली परीक्षा यह होगी कि अब तक शुरू किए गए सुधार कितनी मजबूती से संस्थागत परंपरा में बदलते हैं।
निष्कर्ष : उपलब्धियों से आगे, एक बड़े सपने की ओर
जामिया मिल्लिया इस्लामिया का इतिहास संघर्ष से बना है और उसका भविष्य दृष्टि, ज्ञान तथा नवाचार से लिखा जाएगा। स्वतंत्रता आंदोलन की पृष्ठभूमि से जन्मी यह संस्था आज वैश्विक उच्च शिक्षा के मानचित्र पर अपनी उपस्थिति मजबूत कर रही है।
प्रो. मज़हर आसिफ के नेतृत्व में अकादमिक विस्तार, नई शिक्षा नीति का क्रियान्वयन, अंतरराष्ट्रीयकरण, शोध और वैश्विक रैंकिंग की दिशा में दिखाई देने वाली प्रगति उल्लेखनीय है। वहीं प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिज़वी की प्रशासनिक भूमिका ने पदोन्नति, वेतन, परीक्षा व्यवस्था, कार्यालयी समन्वय और कर्मचारी कल्याण जैसे क्षेत्रों में समयबद्धता और प्रशासनिक दक्षता को आगे बढ़ाने में योगदान दिया है। जामिया के आधिकारिक रिकॉर्ड में दोनों के कार्यकाल को अकादमिक उत्कृष्टता, संस्थागत विस्तार और प्रशासनिक सुधार से जोड़ा गया है।
आज जामिया की उपलब्धियों की सूची लंबी है—NIRF में मजबूत स्थिति, THE और QS में वैश्विक उछाल, नए अकादमिक कार्यक्रम, NEP 2020 का क्रियान्वयन, अंतरराष्ट्रीय संपर्क, परीक्षा एवं प्रवेश प्रक्रिया में तेजी, कर्मचारी पदोन्नति, डिजिटल सुधार, पुस्तकालय सुविधाओं का विस्तार, पर्यावरणीय पहल और विद्यार्थियों की राष्ट्रीय स्तर पर सफलता।
लेकिन इन उपलब्धियों का सबसे सुंदर पक्ष यह है कि जामिया की मूल आत्मा अभी भी शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ी हुई है।
किसी विश्वविद्यालय की महानता केवल उसकी इमारतों की ऊंचाई, रैंकिंग या बजट से तय नहीं होती। उसकी महानता इस बात से तय होती है कि वह अपने विद्यार्थियों के सपनों को कितना विस्तार देता है, अपने शिक्षकों की प्रतिभा को कितना अवसर देता है, अपने कर्मचारियों के श्रम का कितना सम्मान करता है और समाज के लिए कितना उपयोगी ज्ञान पैदा करता है।
यदि वर्तमान गति को संस्थागत निरंतरता, पारदर्शिता, अकादमिक स्वतंत्रता, शोध की गुणवत्ता और विद्यार्थी-केंद्रित नीतियों के साथ आगे बढ़ाया जाता है, तो जामिया आने वाले वर्षों में न केवल भारत के श्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है, बल्कि वैश्विक अकादमिक समुदाय में भी अपनी विशिष्ट पहचान और प्रभाव को और व्यापक बना सकता है।
प्रो. मज़हर आसिफ और प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिज़वी के नेतृत्व में जामिया की वर्तमान यात्रा को इसलिए केवल ‘उपलब्धियों का दौर’ कहना पर्याप्त नहीं होगा। इसे एक ऐसे संक्रमणकाल के रूप में देखना अधिक उचित होगा, जिसमें एक ऐतिहासिक विश्वविद्यालय अपनी विरासत को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक, वैश्विक, तकनीक-सक्षम और भविष्य के लिए तैयार विश्वविद्यालय बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
जामिया की कहानी आज भी जारी है। फर्क सिर्फ इतना है कि अब इस कहानी के अगले अध्याय में इतिहास के साथ भविष्य की आकांक्षाएं भी उतनी ही मजबूती से दिखाई दे रही हैं।



