अब्दुर्रहमान पत्रकार सिद्धार्थनगर ph.6390663779
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
सिद्धार्थनगर। आज से नए इस्लामी साल 1448 हिजरी की शुरुआत हो गई है। इस्लामी कैलेंडर के पहले महीने मुहर्रम का चांद दिखाई देने के साथ ही मुसलमानों ने नए हिजरी वर्ष का स्वागत किया। मुहर्रम का महीना इस्लाम में अत्यंत सम्मानित और बरकत वाला महीना माना जाता है।मुहर्रम की पहली तारीख से ही दुनिया भर में हजरत इमाम हुसैन (रज़ि.) और कर्बला के शहीदों की याद में मजलिसों एवं तकरीरों का सिलसिला शुरू हो जाता है। इसी क्रम में आज से हजरत इमाम हुसैन (रज़ि.) की शहादत का बयान किया जाएगा, जिसमें कर्बला की महान कुर्बानी, इंसानियत, सब्र, हक और इंसाफ के लिए दी गई मिसालों को लोगों के सामने पेश किया जाएगा।उलेमा-ए-किराम ने बताया कि कर्बला की घटना केवल एक ऐतिहासिक वाकया नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए एक संदेश है कि सत्य और न्याय की रक्षा के लिए हर प्रकार की कुर्बानी दी जा सकती है। हजरत इमाम हुसैन (रज़ि.) ने अपने परिवार और साथियों के साथ अत्याचार के खिलाफ डटकर मुकाबला किया और शहादत का जाम पीकर इस्लाम की मूल शिक्षाओं को जीवित रखा।मुहर्रम के अवसर पर विभिन्न स्थानों पर मजलिस, दुआ और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जहां कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की जाएगी। लोगों से आपसी भाईचारा, अमन-चैन और इंसानियत के संदेश को अपनाने की अपील भी की गई है।”कर्बला हमें सिखाती है कि हक की राह में चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं, सच्चाई का साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए।”


