कानपुर। गणतंत्र दिवस के अवसर पर अमन अमीर हमज़ा वेलफेयर सोसाइटी द्वारा आयोजित गणतंत्र दिवस संगोष्ठी का भव्य और गरिमामय आयोजन 25 जनवरी 2026, प्रातः 11:00 बजे, एम एच एम पब्लिक स्कूल, आवास विकास हंसपुरम, नौबस्ता (नियर शिफा हॉस्पिटल), कानपुर में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का विषय “भारत की आज़ादी की लड़ाई एवं हिंदू/मुस्लिम नेताओं का साझा योगदान देश की सुरक्षा में साझा हिस्सेदारी की भावना को बढ़ावा देना” रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत में अशफ़ाक सिद्दीकी ने मंचासीन सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि भारत की पहचान उसकी साझी संस्कृति, भाईचारे और आपसी सम्मान से है। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी तक स्वतंत्रता संग्राम के वास्तविक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता के संदेश को पहुँचाना हम सबकी जिम्मेदारी है।
अतिथियों के विचार
प्रोफेसर ख़ान फारूक़ ख़ान (हलीम पी.जी. कॉलेज, कानपुर)
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भारत की आज़ादी केवल किसी एक वर्ग या समुदाय की देन नहीं है, बल्कि इसमें हर धर्म और हर समाज के लोगों ने कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष किया। उन्होंने मौलाना आज़ाद, अशफ़ाक़ उल्ला ख़ान, भगत सिंह और सुभाष चंद्र बोस जैसे महान नेताओं का उदाहरण देते हुए कहा कि आज भी देश को उसी एकता और बलिदान की भावना की आवश्यकता है।
प्रोफेसर आनंद शुक्ला (वी.एस.एस.डी. कॉलेज, कानपुर)
प्रोफेसर शुक्ला ने कहा कि संविधान ने हमें समानता, स्वतंत्रता और भाईचारे का अधिकार दिया है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि जब तक समाज में आपसी विश्वास और समरसता बनी रहेगी, तब तक भारत प्रगति के पथ पर अग्रसर रहेगा। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे संविधानिक मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करें।
हकीम सलीम नूरी (फाउंडर, नूरी फाउंडेशन)
हकीम सलीम नूरी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा केवल सीमाओं पर तैनात सैनिकों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के हर नागरिक की भी नैतिक जिम्मेदारी है। आपसी भाईचारा, सामाजिक सौहार्द और एक-दूसरे के प्रति सम्मान ही देश को आंतरिक रूप से मज़बूत बनाते हैं।
डॉ. सुहैल चौधरी
डॉ. चौधरी ने कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों और युवाओं में राष्ट्रप्रेम, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना विकसित करते हैं।
अन्य वक्ताओं के विचार
अतीक अहमद ने कहा कि आज़ादी की लड़ाई से हमें यह सीख मिलती है कि जब देश पर संकट आता है तो सभी मतभेद भुलाकर एकजुट होना चाहिए।
इसरार अहमद और तौहीद अहमद ने कहा कि सामाजिक सौहार्द ही भारत की सबसे बड़ी ताकत है और इसे बनाए रखना हम सभी का कर्तव्य है।
सिराज हाशिम ने युवाओं से नशा, हिंसा और नकारात्मक सोच से दूर रहकर राष्ट्रनिर्माण में योगदान देने की अपील की।
आसिफ हबीबी, राज कुमार पाल, शिफा बानो और नदीम ने भी अपने विचार रखते हुए ऐसे आयोजनों को समाज के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।संगोष्ठी में अतीक अहमद, इसरार अहमद, तौहीद अहमद, सिराज हाशिम, डॉ. सुहैल चौधरी, आसिफ हबीबी, राज कुमार पाल, शिफा बानो, नदीम सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए ऐसे आयोजनों को समय की आवश्यकता बताया।
अंत में आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं उपस्थित जनसमुदाय का आभार व्यक्त किया गया और राष्ट्रीय एकता, भाईचारे व सौहार्द के संदेश को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों, वक्ताओं और उपस्थित नागरिकों का आभार व्यक्त किया गया। संगोष्ठी का समापन राष्ट्रीय एकता, भाईचारे और देशभक्ति के संदेश के साथ हुआ, जिसने उपस्थित जनसमूह को गहराई से प्रेरित किया।



