फतेहपुर के जीलानी मस्जिद में जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी और इस्तक़बालिया जलसा आयोजित हुआ। मौलाना हाशिम अशरफ़ी ने सोशल मीडिया पर फैल रही गलत जानकारी को लेकर लोगों को सावधान किया।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!कानपुर। फतेहपुर, 10 अप्रैल। मोहम्मद उस्मान कुरैशी
फतेहपुर के पीरनपुर स्थित जीलानी मस्जिद में ऑल इंडिया ग़रीब नवाज़ काउंसिल के तत्वावधान में जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी ﷺ और इस्तक़बालिया जलसे का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की सदारत ग़ाज़ी-ए-इस्लाम हज़रत अल्लामा मौलाना अलहाज मोहम्मद हाशिम अशरफ़ी (क़ौमी सदर, ऑल इंडिया ग़रीब नवाज़ काउंसिल व इमाम ईदगाह गद्दीयाना) ने की।
इस दौरान क़ाज़ी-ए-शहर फतेहपुर हज़रत अल्लामा मौलाना मुफ़्ती शहाबुद्दीन मिस्बाही और नायब क़ाज़ी हज़रत हाफ़िज़ अकील अहमद का अमामा शरीफ़ पहनाकर और फूल-मालाओं से शानदार इस्तक़बाल किया गया।
सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही गलत जानकारी से रहें सतर्क
अपने विशेष संबोधन में मौलाना हाशिम अशरफ़ी ने सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आजकल क़ुरआन पाक की आयतों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है, जिससे समाज में भ्रम फैल रहा है।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के जरिए हिन्दू-मुस्लिम के बीच नफ़रत फैलाने की कोशिश की जाती है और झूठी खबरों का प्रसार तेजी से हो रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि बिना सही जानकारी के किसी भी बात पर बहस करने या उसे आगे बढ़ाने से बचें।
इस्लाम का सही प्रतिनिधि कौन?
मौलाना अशरफ़ी ने स्पष्ट किया कि हर व्यक्ति जो कुर्ता-पायजामा, दाढ़ी या टोपी पहनता है, उसे इस्लाम का प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि इस्लाम का असली प्रतिनिधि वही है जो क़ुरआन और हदीस की रोशनी में समस्याओं का समाधान करने की क्षमता रखता हो और जिसे समाज मार्गदर्शन के लिए स्वीकार करता हो।
इल्म हासिल करना हर इंसान पर फ़र्ज़
इल्म की अहमियत पर जोर देते हुए मौलाना ने कहा कि हर मर्द और औरत पर ज़रूरी इल्म हासिल करना फ़र्ज़ है। उन्होंने पैग़म्बर-ए-इस्लाम ﷺ की हदीस का हवाला देते हुए कहा कि ज्ञान प्राप्त करने के लिए जरूरत पड़े तो दूर देशों तक सफर करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल नौकरी पाने के लिए नहीं, बल्कि समाज में रोशनी फैलाने के लिए हासिल की जानी चाहिए। जहालत अंधेरा है और इल्म रोशनी, इसलिए लोगों को ज्ञान के जरिए खुद को और अपने देश को मजबूत बनाना चाहिए।
कार्यक्रम की शुरुआत तिलावत से
कार्यक्रम की शुरुआत हाफ़िज़ मोहम्मद आसिफ़ द्वारा तिलावत-ए-क़ुरआन से हुई, जबकि निज़ामत के फ़राइज़ हाफ़िज़ नियाज़ अहमद अशरफ़ी ने निभाए।
बारगाह-ए-रिसालत में अलहाज सैयद खुर्शीद आलम, मोहम्मद हसन शिब्ली अशरफ़ी, क़ारी मोहम्मद आमिर अशरफ़ी और हाफ़िज़ अबरार अहमद ने नातिया कलाम पेश किया।
बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद
इस मौके पर क़ारी अब्दुल हफ़ीज़, मौलाना मुईनुद्दीन अशरफ़ी, हाफ़िज़ ज़फ़र आलम, हाफ़िज़ मोहम्मद अख़लाक़, क़ारी शरीफ़ हुसैन अत्तारी, क़ारी फ़रीदी, हाफ़िज़ इदरीस अहमद, हाफ़िज़ शाहिद रज़ा, हाफ़िज़ फ़ैज़ान अहमद और मौलाना अकरम सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।



