छह माह बाद शिशु को ऊपरी आहार देना बेहद जरूरी: विशेषज्ञों ने दी जानकारी
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!कानपुर। भारतीय बालरोग अकादमी, कानपुर द्वारा बाल रोग विभाग सभागार में “पूरक आहार दिवस” के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन अकादमी के सचिव डॉ. अमितेश यादव ने किया। इस अवसर पर अनेक बाल रोग विशेषज्ञों, रेजिडेंट डॉक्टरों और माताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
डॉ. अमितेश यादव ने अपने संबोधन में कहा कि शिशु के जन्म के बाद पहले छह महीनों तक केवल मां का दूध ही सर्वश्रेष्ठ होता है। लेकिन छह माह पूरे होने के बाद बच्चे की शारीरिक आवश्यकताएं बढ़ जाती हैं, जिसके लिए मां के दूध के साथ-साथ ऊपरी आहार (पूरक आहार) देना बेहद आवश्यक होता है। उन्होंने बताया कि इस उम्र में बच्चों की हलचल और गतिविधियां बढ़ जाती हैं, जिससे शरीर को अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। ऐसे में ऊपरी आहार न केवल बच्चे की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करता है, बल्कि उसके विकास में भी सहायक होता है।
इस अवसर पर डॉ. यशवंत राव ने बताया कि पूरक आहार की शुरुआत हल्के और आसानी से पचने वाले पदार्थों से करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि “ज्यादा पानी में उबले हुए चावल को मसलकर दूध में मिलाकर देना सबसे उत्तम होता है।” इसके अलावा केला, पपीता, सेब जैसे फलों को मसलकर भी बच्चों को दिया जा सकता है। उन्होंने माताओं को सलाह दी कि शिशु के भोजन में विविधता लाकर धीरे-धीरे नए स्वाद और बनावट से परिचित कराना चाहिए।
कार्यक्रम में पूर्व डीजीएमई डॉ. वी.एन. त्रिपाठी, डॉ. रूपा डालमिया सिंह, डॉ. शैलेन्द्र गौतम, डॉ. प्रतिभा सिंह, और डॉ. नेहा अग्रवाल सहित अनेक चिकित्सक उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में माताओं ने भी भाग लेकर अपने अनुभव साझा किए और विशेषज्ञों से सलाह ली।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य माताओं में जागरूकता बढ़ाना था ताकि वे अपने शिशुओं के सही पोषण और स्वास्थ्य विकास के प्रति सतर्क रहें। इस पहल को सभी ने सराहा और ऐसे जनजागरूकता कार्यक्रमों की निरंतरता पर बल दिया।



