
ताएफ में ज़ुल्म सहके भी दुशमन को दी दुआ:पढ़कर तो देखिए कभी सीरत रसूल की
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!बाराबंकी।(अबू शहमा अंसारी) स्वर्ग चाहते हो तो माता-पिता की सेवा करो।सुकून चाहते हो तो नेकियों के रास्ते पर चलो और गरीबों की मदद करो। उपरोक्त विचार ग्राम मल्लावां पोस्ट खिजना तहसील फतेहपुर में आयोजित होने वाले धार्मिक कार्यक्रम जलसा-ए-सीरतुन्नबी एवं नातिया मुशायरे में मौलाना मो0 सलमान मज़ाहिरी ने व्यक्त किये। उन्होंने आगे कहा कि मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम ने अल्लाह के आखिरी नबी हैं और उन्होंने हमेशा मानवता, मोहब्बत और भाईचारे के संदेश दिया है। मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम सिर्फ मुसमानों के लिए ही नहीं बल्कि दुनिया के तमाम इन्सानों के लिए रहमत बनकर तशरीफ़ लाये और बगैर किसी भेद भाव के सभी से स्नेह और प्रेम से पेश आये। अध्यक्षीय सम्बोधन में मुफ़्ती सद्दाम क़ासमी ने कहा कि प्यारे आक़ा के दुनिया में तशरीफ़ लाने से पहले बच्चियों को ज़िन्दा दफन कर दिया जाता था औरतों की इज़्ज़त नहीं होती थी लेकिन प्यारे आक़ा की शिक्षाओं और उपदेशों ने लोगों के दिल बदल दिए, लोगों में इन्सानियत, तहज़ीब आ गई और लोग दीन की तालीमात के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़रने लगे और एक दूसरे की इज़्ज़त करने लगे। इस धार्मिक कार्यक्रम जलसा-ए-सीरतुन्नबी व नातिया मुशायरे का प्रारम्भ कारी रज़ी आलम नदवी, व इमाम हाफिज ज़ियाउद्दीन की तिलावते-क़ुरआन से हुआ और नौजवान शायर हस्सान साहिर ने बारगाहे रिसालत मआब में हदयए-नात पेश की जबकि संचालन के फ़राएज़ जमीअत-उलमा बाराबंकी के लीगल एडवाइज़र और उत्तर प्रदेश सुन्नी सेन्ट्रल वक़्फ़ बोर्ड लखनऊ के जिला बाराबंकी के कोआर्डिनेटर एडवोकेट अहमद सईद हर्फ़ ने अन्जाम दिए। अहमद सईद हर्फ़ ने पढ़ा- ताएफ में ज़ुल्म सहके भी दुश्मन को दी दुआ, पढ़कर तो देखिए कभी सीरत रसूल की। वसीम रामपूरी ने पढ़ा- इज़्ज़त मेरे आक़ा के घराने के लिए है, फिर उसके बाद सारे ज़माने के लिए है। कलीम तारिक़ सैदनपूरी ने पढ़ा- नात जब पढ़ता हूँ उनकी शान में, जान आ जाती है मेरी जान में। शराफत बिस्वानी ने पढ़ा- मेरा नात लिखना पढ़ना मेरे काम आ रहा है, कि नबी के आशिक़ों में मेरा नाम आ रहा है। हस्सान साहिर ने पढ़ा- बू-बकरो -उमर, उस्माँ चाहे की हैदर हों, सदियों से ज़माने में चार चमकते हैं। रिज़वान जमाली ने पढ़ा- पढ़ें छुपकर नमाज़ें बुज़दिली ये हो नहीं सकती, बिला खौफ-ओ-खतर ये कह दिया फ़ारूके आज़म ने। इसके अलावा कारी परवेज़ यज़दानी, अमीरुल हसन तंबौरी, कारी ज़ीशान जहांगीराबादी ने भी अपनी नातिया रचनाएं प्रस्तुत कीं। कमेटी के सदस्यों द्वारा कार्यक्रम में पधारे अतिथियों मो0 अशफ़ाक़ जिला पंचायत सदस्य, राजेश यादव पूर्व प्रधान, नागेश्वर प्रधान खिंजना, मो0 जावेद प्रधान प्रतिनिधि मल्लावां, संजय प्रधान, रमेश वर्मा बीडीसी सदस्य, मास्टर मो0 इमरान, मो0 रफ़ीक़, मो0 हलीम ठेकेदार की गुलपोशी करके स्वागत एवं अभिनन्दन किया गया। अंत में कार्यक्रम के कन्वीनर मो0 लुक़मान ने सभी मौलानाओं, मेहमानों, शायरों और श्रोताओं का शुक्रिया अदा किया। इस अवसर पर शाकिर अली पूर्व प्रधान मल्लावाँ, मो० शफीक, मो० अंसार, लल्लन, मो० जाबिर, चाँदबाबू, इम्तियाज़, जमील टेलर, अफजल टेलर, मो० असलम, मज़हरूल, मो० रियाज़, मो० शकील, मो० रईस गुलाम वारिस, मुशीर, रहमत अली, अख़्तर अली, शमीम मिस्त्री, मो० लतीफ, नुसरत अली, शमशाद टेलर मो० आसिफ, शमसुद्दीन, शमशेर अली, मो० इरफान राका, चाँद ख़ाँ, बब्बन, दोस्त मोहम्मद, मो० सत्तार आदि लोग उपस्थित रहे।


