क़ाज़ी-ए-शहर मुफ़्ती साक़िब अदीब के हाथों तक्मील की सआदत
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!कानपुर।मोहम्मद उस्मान कुरैशी।
शहर के मरकज़-ए-इल्म-ओ-इरफ़ान अल-जामियतुल इस्लामिया अशरफुल मदारिस गदियाना में बरोज़ इतवार जश्न-ए-तक्मील-ए-क़ुरआन मजीद की एक रूह-परवर और अज़ीम-उश-शान तक़रीब ख़दीजतुल कुबरा हॉल में मुनअक़िद हुई, जिसमें उलेमा व मशाइख़ समेत अवाम की बड़ी तादाद ने शिरकत की।
इस नूरानी महफ़िल की सरपरस्ती ऑल इंडिया ग़रीब नवाज़ काउंसिल के क़ौमी सदर और जामिया के सरबराह-ए-आला ग़ाज़ी-ए-इस्लाम हज़रत अल्लामा मौलाना मुहम्मद हाशिम अशरफी साहब क़िब्ला ने फ़रमाई, जबकि मेहमान-ए-खुसूसी के तौर पर क़ाज़ी-ए-शहर कानपुर हज़रत अल्लामा मौलाना मुफ़्ती साक़िब अदीब मिस्बाही साहब क़िब्ला ने शिरकत कर के महफ़िल को रौनक़ बख़्शी।
तक़रीब के दौरान तक्मील-ए-क़ुरआन की सआदत हज़रत मुफ़्ती साक़िब अदीब मिस्बाही साहब ने अंजाम दी और इस मौक़े पर तलबा व हाज़िरीन से निहायत बसीरत-अफ़रोज़ ख़िताब करते हुए फ़रमाया कि क़ुरआन मजीद सिर्फ़ अल्फ़ाज़ का मजमूआ नहीं बल्कि अल्लाह का वह ज़िंदा कलाम है जो मुर्दा दिलों को हयात बख़्शता है। जो लोग क़ुरआन को अपने सीनों में महफ़ूज़ करते हैं, वे अल्लाह के ख़ास बंदे हैं।
आपने तलबा को नसीहत करते हुए कहा कि हाफ़िज़-ए-क़ुरआन होना एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है, लिहाज़ा आपका किरदार ऐसा बे-दाग़ होना चाहिए कि लोग आपको देखकर इस्लाम की हक़्क़ानियत का इकरार करें और आपको क़ुरआन के अहकामात को अपनी अमली ज़िंदगी में नाफ़िज़ करना होगा, ताकि दुनिया व आख़िरत में कामयाबी आपके क़दम चूमें।
इस मौक़े पर जामिया के सरबराह-ए-आला हज़रत अल्लामा मौलाना मुहम्मद हाशिम अशरफी साहब ने अपने सदारती व नासिहाना ख़िताब में फ़रमाया कि मदारिस-ए-इस्लामिया दीन के वह मज़बूत क़िले हैं जहाँ से ईमान की शम्अें रोशन होती हैं और आज के इस पुर-फ़ितन दौर में अपनी औलाद को दीनी तालीम से आरास्ता करना हर मुसलमान वालिदैन का अव्वलीन फ़र्ज़ है। आपने ज़ोर देकर कहा कि क़ुरआन से दूरी ही हमारी ज़बूँहाली का सबब है, लिहाज़ा हमें चाहिए कि हम क़ुरआन के दामन को मज़बूती से थाम लें और अपने घरों को तिलावत से आबाद रखें, ताकि मोआशरे में ख़ैर व बरकत का नुज़ूल हो।
इस पुरमसर्रत और बाबरकत तक़रीब में इदारे के जुम्ला अराकीन, असातिज़ा व जमीअ तलबा के अलावा अल-हाज सैयद ख़ुरशीद आलम, मौलाना मुबारक हुसैन अशरफी, हाजी अरबी हसन, हाजी आरिफ अशरफी, हाजी रसूल बख़्श, लाल मुहम्मद (मैनेजर), शमशाद गाज़ी, शेरा भाई आदि शरीक रहे।
प्रोग्राम के आख़िर में मुल्क व मिल्लत की सलामती और मुसलमानों की सरबलंदी के लिए ख़ुसूसी दुआएँ माँगी गईं। इंशा अल्लाह आने वाली 3 जनवरी को अशरफुल अंबिया कॉन्फ़्रेंस व जश्न-ए-दस्तार-ए-फ़ज़ीलत निहायत तज़क व एहतेशाम के साथ मुनअक़िद होगा। आप तमामी हज़रात कसीर तादाद में शिरकत फ़रमाएँ और सवाब-ए-दारेन हासिल करें।



