क्या हो अगर कोई किताब आपसे यह सवाल पूछे:
“क्या अंतिम अवतार आने वाला है… या आ चुका है?”
यह पुस्तक यही करती है।
लेखक वेदों, पुराणों और ऐतिहासिक ग्रंथों को सामने रखकर एक असहज लेकिन साहसिक तुलना करता है
एक तरफ़ कल्कि अवतार की भविष्यवाणियाँ,
दूसरी तरफ़ मुहम्मद साहब का ऐतिहासिक व्यक्तित्व।
किताब दावा नहीं थोपती,
बल्कि पाठक के सामने शास्त्रों के उद्धरण, तिथियाँ, लक्षण और घटनाएँ रख देती है
और फिर चुप हो जाती है।
अब फैसला आपका।
🔹 क्या कल्कि अवतार केवल भविष्य की कल्पना है?
🔹 या “अंतिम अवतार” की अवधारणा को हम गलत समय में ढूंढ रहे हैं?
🔹 क्या धर्म अलग-अलग दिखते हैं, लेकिन संकेत एक ही दिशा में इशारा करते हैं?
किताब यह भी बताती है कि जब समाज में
अन्याय बढ़ता है
धर्म सत्ता का औज़ार बन जाता है
और सत्य धुंधला हो जाता है
तो अवतार तलवार से नहीं, विचार से आता है।
👉 यह पुस्तक न तो किसी धर्म पर हमला करती है,
👉 न किसी को महान साबित करने की ज़िद रखती है।
यह सिर्फ़ एक बात करती है
आपकी बनी-बनाई सोच को हिलाती है।
अब सवाल यह नहीं कि आप सहमत हैं या नहीं,
सवाल यह है:
अगर यह सब सच निकला तो?
और अगर झूठ है, तो फिर इतने शास्त्र एक-दूसरे से मेल क्यों खाते हैं?
👇 अब आपकी बारी है
आप क्या सोचते हैं
कल्कि आना बाकी है… या आ चुका है?
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