कानपुर। मोहम्मद उस्मान कुरैशी।
महान शायर और राष्ट्रगीत “सारे जहाँ से अच्छा हिन्दुस्तां हमारा” के रचयिता अल्लामा मुहम्मद इक़बाल की जयंती पर आज एमएमए जौहर फैन्स एसोसिएशन की ओर से मोहम्मद अली पार्क, चमनगंज में एक भव्य जलसा-ए-ख़िराज-ए-अक़ीदत का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष हयात ज़फ़र हाशमी ने की, जबकि संचालन जिला समन्वयक मोहम्मद ईशान ने किया।
कार्यक्रम की शुरुआत में अल्लामा इक़बाल की याद में फ़ातिहा पढ़ी गई और उनके लिखे प्रसिद्ध शेरों को पढ़कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। राष्ट्रीय अध्यक्ष हयात ज़फ़र हाशमी ने कहा कि अल्लामा इक़बाल न केवल एक महान शायर थे बल्कि एक दूरदर्शी चिंतक और समाज सुधारक भी थे। उनकी इंक़लाबी शायरी ने उस दौर में अंग्रेज़ी हुकूमत की नींव को हिला दिया था और लोगों के दिलों में आज़ादी का जुनून भर दिया था।
हयात ज़फ़र हाशमी ने कहा :
“अल्लामा इक़बाल की सोच सिर्फ़ कविताओं तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह एक ऐसी विचारधारा के प्रतीक थे जिसने पूरी एक पीढ़ी को जागरूक किया। उनकी शायरी में आत्म-सम्मान, एकता और देशभक्ति की भावना साफ़ झलकती है।”
उन्होंने अल्लामा इक़बाल की मशहूर पंक्तियाँ उद्धृत करते हुए कहा —
“अब हवाएं खुद करेंगी रोशनी का फैसला,
जिस दिये में जान होगी, वही दिया रह जाएगा।”
इन पंक्तियों के माध्यम से हयात ज़फ़र हाशमी ने इक़बाल को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश की। साथ ही उन्होंने कहा कि अल्लामा की कुर्बानियों और उनके विचारों को भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने अपने कलाम के ज़रिए न सिर्फ़ भारत बल्कि पूरी दुनिया में इंसानियत, भाईचारे और मोहब्बत का पैग़ाम दिया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने इक़बाल की प्रसिद्ध पंक्तियाँ दोहराईं :
“हज़ारों साल नरगिस अपनी बेनूरी पर रोती है,
बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावर पैदा।”
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और सभी ने अल्लामा इक़बाल के विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर अजीज़ुल हसन कुरैशी, मोहम्मद ईशान, शहनवाज़ अंसारी, नफ़ीस अहमद, फरहान कुरैशी, अलीम अख़्तर ख़ान सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी उपस्थित रहे।
समापन पर राष्ट्रीय अध्यक्ष हयात ज़फ़र हाशमी ने कहा कि आज की पीढ़ी को अल्लामा इक़बाल के जीवन और उनके विचारों से प्रेरणा लेनी चाहिए। उनकी शायरी आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी आज़ादी के पहले थी।



